Tuesday, April 27, 2021

मुन्नाभाई MBBS से प्रेरणा।

मुन्ना भाई एमबीबीएस यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल भी रहे और प्रेरणादाई भी है। घर से से भागा हुआ गांव का एक लड़का मुंबई में गलत संगति में फंस कर बड़ा गुंडा बन जाता है । उसके मन में डॉक्टर बनने की लालसा होती है और वह धोखाधड़ी से दाखिला भी दे देता है । मेडिकल साइंस केवल दवाइयों के आधार पर नहीं है परंतु संबंध बनाने के आधार पर चलिए के आधार पर सफल होती है ऐसा इसका सारांश है। एक डॉक्टर के पिता को वह कैरम बोर्ड खिलाकर दुबारा ठीक कर लेता है। उसी प्रकार एक आत्महत्या के लिए तीन बार प्रयास करने वाले युवक को वह सभी संबंधों के आधार पर ठीक करता है वह उसके मुंह पर मुस्कुराहट भी खेलता है। इसी प्रकार एक चिड़चिड़ा सफाई कर्मचारी के साथ संबंध बनाकर के वह उसमें उत्साह भरता है। जादू की झप्पी यह किसी दवा से कबरई बल्कि ज्यादा कारगर है। वह एक जूनियर डॉक्टर को जिसकी आंतों में कैंसर है स्नेह से ठीक करने का प्रयास करता है और उस डॉक्टर का मानना होता है कि दुनिया में अगर मेरे को कोई बचा सकता है तो मुन्ना भाई ही बचा सकता है । और सबसे बड़ा चमत्कार का काम रहे 12 साल से कोमा में पढ़े हुए व्यक्ति के साथ घनिष्ट संबंध बना करके उसको ठीक करने का है। देखा जाए तो यह बात असंभव सी लगती है परंतु सारा मनोविज्ञान इसी बात पर आधारित है। शरीर को स्वस्थ करने की बजाय मन को स्वस्थ किया जाए तो शरीर स्वयं स्वस्थ हो जाता है। पहले ही दिन डॉक्टर अस्थाना विद्यार्थियों के दिमाग में भरता है की मरीज सिर्फ गरीब है उससे कोई शब्द नहीं जोड़ना चाहिए। इससे तार्किक बनाने के लिए वह उदाहरण देता है कि मैंने सैकड़ों मरीजों के ऑपरेशन किए हैं परंतु मेरा हाथ जरा भी काँपा नहीं है। परंतु अगर मैं अपनी प्यारी बेटी का ऑपरेशन करने की सोचूं तो मैं वह काम नहीं कर पाऊंगा। इसलिए वह इस थ्योरी पर काम करता है के पेशेंट केवल पेशेंट ही है, इसको ठीक करना हैं, भावना नहीं आड़े आनी चाहिए। इसलिए डीन स्वयं की टेंशन कम करने के लिए लाफ्टर क्लब जॉइन करता है, इतने विभत्स ढंग से हंसता है कि बाकी लोगों की टेंशन बढ़ जाती है। मुन्नाभाई का पेट डायलाग है, भाई, टेंशन नी लेने का... मुरली प्रसाद शर्मा अर्थात मुन्ना भाई के पिता देवदत्त शर्मा को जब यह मुन्ना भाई सिर झुका के बोलते हैं माफ करना मैं डॉक्टर नहीं बन सका तो उसके पिता बोलते हैं कोई बात नहीं तू एमबीबीएस तो नहीं कर सका परंतु तुमने अपने व्यवहार से लोगों को ठीक किया है जो कि अपने आप में एक मिसाल है मुझे तुम पर गर्व है।
एक कहानी और भी आज पढ़ी है। एक मरीज का ऑपरेशन होना था उस से 2 घंटे पहले एक नर्स आकर के उसके फूलदान को सजाती है और पूछती है कि आज आप का ऑपरेशन कौन करेगा। मरीज  एक डॉक्टर गिब्सन  का नाम लेता है तो नर्स बोलती है असंभव क्योंकि वह डॉक्टर बहुत नामी-गिरामी डॉक्टर है और रोज पेशेंट की लाइन इवनिंग उससे ऑपरेशन करवाने के लिए लालायित रहती है और सिफारिशें भी लग जाते हैं । अतः वह व्यक्ति आपको कभी कमिट  नहीं करेगा। पेशेंट बड़े विश्वास से कहते हैं कि उन्होंने मुझको हां भरी है। लेकिन फिर नर्स बताती है कि उसके द्वारा किया हुआ ऑपरेशन आज तक कभी असफल नहीं हुआ है, 100% सफल। इसलिए उस डॉक्टर की बहुत ज्यादा मांग है। अतः आप का बहुत ही अहोभाग्य होगा कि अगर वह डॉक्टर आप का ऑपरेशन करता है। सच में वही डॉक्टर ऑपरेशन करते हैं और मरीज ठीक हो जाता है। बरसों बाद उसको पता लगता है कि वह डॉक्टर आज सामान्य डॉक्टर नहीं था परंतु वह नर्स नर्स नहीं थी बल्कि वहां के मनोवैज्ञानिक विभाग की प्रमुख डॉक्टर थी जो उसका डॉक्टर के प्रति आस्था भाव पैदा करना चाहती थी। आजकल डॉक्टर के प्रति इसी आस्था की कमी हो रही है और एक बहुत बड़ा वर्ग यह नाश्ता फैलाने का काम कर रहा है।
राष्ट्रीय श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी जी उस पश्चिम के विद्वान का उल्लेख अपनी पुस्तक विकास की अवधारणा में  कहते हैं कि डॉक्टर और यह मेडिकल साइंस मरीज को ठीक नहीं खराब करते हैं और अधिकांश बीमारियां अस्पतालों से ही पैदा होती हैं। वे इवान इलिच का नाम लेते हैं जो एक डिफ्रॉक्ड यानी निष्काषित बड़ा पादरी था। उसने बताया कि  आज की संस्थाएं और तथाकथित एक्सपट्र्स दुनिया में कितना नुकसान कर रहे हैं । वह समय दुनिया में इंडस्ट्रियल रेवोलुशन का था। उनकी पुस्तक मेडिकल नेमेसिस में वे लिखते हैं की दवा देने वाला और दवाई, यानी cure तथा healer दोनों ने मिलकर दुनिया को बहुत बीमार बनाया  है। एक शब्द है मेडिकल पावर्टी जिसने फार्मा इंडस्ट्री ने दुनिया को लूटने के फ्रॉड किये है। ग्रीक में iatrog हीलर को कहते हैं और अधिकांश डॉक्टर व दवाई जाने, अनजाने लोगों को लूटे, इसके लिए उसने शब्द नया ईजाद किया iatrogenesis, ओह।आधुनिक मनोवैज्ञानिक भी ड्रग्स, यानी नशा देकर केटेम्पररी ट्रीटमेंट कर रहे है और परमानेंट बीमार कर रहे है।  और कुल मिलाकर के मैं मुन्ना भाई एमबीबीएस की वकालत नहीं कर रहा और ना ही मैं पोंगा पंथी बनने की सिफारिश कर रहा हूं। मेरा कहना है कि मेडिकल साइंस में अपनापन का स्थान भी होना चाहिए और अपनापन मेडिसिन से भी आगे है दवा से जुआ कई बार ज्यादा असर करती है।
 ivan Illich

(1926-2002)

"His thought leads out of the prison of routinized, sterile, preconceived notions"

Ivan Illich, defrocked Catholic itinerant priest who spent a lifetime unmasking the pernicious hold of institutions and professionals on our lives, passed away in Bremen, Germany, on December 2, 2002. He was 76.

in Medical Nemesis, he famously declared that "the medical establishment has become a major threat to health." He argued that expert systems like modern health obscure the political conditions that render society unhealthy; and that they tend to expropriate the power of individuals to heal themselves and to shape their environment. He coined the word "iatrogenesis" to describe the condition wherethe cure and the healer (read medicine and hospitals) themselves become sources of sickness.
The term iatrogenesis means brought forth by a healer, from the Greek ἰατρός (iatros, "healer") and γένεσις (genesis, "origin"); as such, in its earlier forms, it could refer to good or bad effects.

Tuesday, April 20, 2021

क्षमाशील अध्यापक

"प्रणाम सर! मुझे पहचाना?"

"कौन?"

"सर, मैं आपका विद्यार्थी। 40 साल पहले का आपका विद्यार्थी।"

"ओह! अच्छा। आजकल ठीक से दिखता नही बेटा और याददाश्त भी कमज़ोर हो गयी है। इसलिए नही पहचान पाया। खैर। आओ, बैठो। क्या करते हो आजकल?" उन्होंने उसे प्यार से बैठाया और पीठ पर हाथ फेरते हुए पूछा।

"सर, मैं भी आपकी ही तरह आपके ही कारण शिक्षक बन गया हूँ।"

"वाह! यह तो अच्छी बात है लेकिन मेरे कारण कैसे...?"
में कुछ समझ नही पाया।

"सर। जब मैं कक्षा सातवीं में था तब हमारी कक्षा में एक घटना घटी थी। उसमें से आपने मुझे बचाया था। मैंने तभी शिक्षक बनने का निर्णय ले लिया था। वो घटना मैं आपको याद दिलाता हूँ। आपको मैं भी याद आ जाऊँगा।"

"अच्छा! क्या हुआ था तब बेटा, मुझे ठीक से कुछ याद नहीं.....?"

"सर, सातवीं में हमारी कक्षा में एक बहुत अमीर लड़का पढ़ता था। जबकि हम बाकी सब बहुत गरीब थे। एक दिन वह बहुत महंगी घड़ी पहनकर आया था और उसकी घड़ी चोरी हो गयी थी। कुछ याद आया सर?"

"सातवीं कक्षा?"

"हाँ सर। उस दिन मेरा मन उस घड़ी पर आ गया था और खेल के पीरियड में जब उसने वह घड़ी अपने पेंसिल बॉक्स में रखी तो मैंने मौका देखकर वह घड़ी चुरा ली थी।  
उसके ठीक बाद आपका पीरियड था। उस लड़के ने आपके पास घड़ी चोरी होने की शिकायत की औऱ बहुत जोर जोर से रोने लगा। आपने कहा कि जिसने भी वह घड़ी चुराई है ,उसे वापस कर दो। मैं उसे सजा नही दूँगा। लेकिन डर के मारे मेरी हिम्मत ही न हुई घड़ी वापस करने की।"

"उसके बाद फिर आपने कमरे का दरवाजा बंद किया और हम सबको एक लाइन से आँखें बंद कर खड़े होने को कहा और यह भी कहा कि आप सबकी जेब औऱ झोला देखेंगे लेकिन जब तक घड़ी मिल नही जाती तब तक कोई भी अपनी आँखें नही खोलेगा वरना उसे स्कूल से निकाल दिया जाएगा औऱ ऊपर से जबरदस्त मार पड़ेगी वो अलग...।"

"हम सब आँखें बन्द कर खड़े हो गए। आप एक-एक कर सबकी जेब देख रहे थे। जब आप मेरे पास आये तो मेरी धड़कन तेज होने लगी। मेरी चोरी पकड़ी जानी थी। अब जिंदगी भर के लिए मेरे ऊपर चोर का ठप्पा लगने वाला था। मैं ग्लानि से भर उठा था। उसी समय जान देने का निश्चय कर लिया था लेकिन...लेकिन मेरी जेब में घड़ी मिलने के बाद भी आप लाइन के अंत तक सबकी जेबें देखते रहे और घड़ी उस लड़के को वापस देते हुए कहा, "अब ऐसी घड़ी पहनकर स्कूल नही आना और जिसने भी यह चोरी की थी वह दोबारा ऐसा काम न करे। इतना कहकर आप फिर हमेशा की तरह पढाने लगे थे "ये कहते कहते उसकी आँख भर आई।"

वह रुंधे गले से बोला, "आपने उस समय मुझे सबके सामने शर्मिंदा होने से बचा लिया था सर। आगे भी कभी किसी पर भी आपने मेरा चोर होना जाहिर न होने दिया। आपने कभी मेरे साथ भेदभाव नही किया। उसी दिन मैंने तय कर लिया था कि मैं आपके जैसा एक आदर्श शिक्षक ही बनूँगा।"

"हाँ हाँ...मुझे याद आया।" उनकी आँखों मे चमक आ गयी। फिर चकित हो बोले, *"लेकिन बेटा... मैं आजतक नही जानता था कि वह चोरी किसने की थी क्योंकि...जब मैं तुम सबकी जेब देख कर रहा था तब मैंने भी अपनी आँखें बंद कर ली थीं...*

इतना कहकर सरजी ने अपने छात्र को गले से लगा लिया......।"

*गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः !*

*गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नम: !!*

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Friday, April 16, 2021

आबादी व भारत

Check the demographics of the developed countries of the world and be startled.

यानी अमरीका सहित दुनिया के 20 प्रमुख उन्नत देशों की जनसंख्या 105 करोड़ है, और बचे हुए 44 में से 25 यूरोपीइन यूनियन के देशों के 6 करोड़ बनती है तो योग बन 111 करोड़ इसमें विश्व के बड़े ब्राज़ील की 21 करोड़ तथा अर्जेंटीना की 4 करोड़ मिलाया जाए तो 136 करोड़ बन जाएगी और यह फिर भी उस देश से एक करोड़ कम रह जाएगी जिसे हम "मेरा प्यारा भारत" कहते हैं। 
The population figures go like this -

USA - 33.1 Crores 
Russia -14.6 Crores 
Germany - 8.5 Crores 
Turkey - 8.4 Crores 
UK - 6.8 Crores
France - 6.5 Crores 
Italy - 6.1 Crores 
Spain - 4.7 Crores 
Poland - 3.8 Crores 
Romania - 1.9 Crores
Netherlands - 1.7 Crores 
Greece - 1.7 Crores 
Belgium -1.2 Crores 
Czech Republic - 1.1 Crores 
Portugal - 1.1 Crores 
Sweden - 1 Crore 
Hungary - 1 Crore
Switzerland - 0.9 Crore
Bulgaria - 0.7 Crore 
Denmark - 0.6 Crore 

*Total* - 105. 3 Crores

The rest of the 25 smaller European countries combined (there are 44 countries in the European continent) - 6 Crores

*Europe - 105.3 + 6 = 111.3 Crores*

Adding the populations of Brazil (21.2 Crores) and Argentina (4.45 Crores) 

111.3 Crores + 25.65 Crores = 136.95 Crores


Thus, finally you have arrived at lndia's population figure of 136 - 138 Crores.

*The implication of managing Covid19 in lndia is as enormous  task as managing it in the entire Europe plus USA, Brazil and Argentina.*

*It's easy to criticise!!*

Wednesday, March 31, 2021

भारतीय युवा

भारतीय युवा
SECTION
1. सावरकर युवा उल्टा वायु
2. कलाम साहब का उद्बोधन
3. पांडा का लेख युवा के आंकड़े। 1.विनायक दामोदर सावरकर को किसी युवा ने पूछा कि आप युवा किस कहते है? 
भाषा शुद्धिकरण के आन्दोलन को चलाते हुए भारतीय भाषाओं को अनेक नवरचित शब्दों का योगदान देनेवाले महान भाषाशास्त्री सावरकर ने उत्तर दिया, “पद को उलटा करके देखो तो उसका अर्थ स्पष्ट हो जाता है। 
युवा का प्रतिशब्द है – ‘वायु’। जैसे अनुशासनहीन वायु प्रभंजन के रुप में जीवन का नाश करता है
 किन्तु
 जब प्राणायाम से अनुशासित हो जाता है तब वही वायु प्राणदाता बन जाता है। वैसे ही युवा हैं। अनुशासित हो तो राष्ट्र का प्राण और अनुशासनहीन होकर किसी भी व्यवस्था के लिए असाध्य चुनौती।”
आज भारत की 62% जनसंख्या युवा है। 
जनगणना के आंकड़ों के अनुसार 13 से 45 के मध्य आयुवाले युवाओें की संख्या कुल 125 करोड की आबादी के 62% अर्थात 75 करोड से ऊपर है। 
किसी भी राष्ट्र के लिए यह अत्यंत गर्व के साथ ही आर्थिक विकास के प्रचंड अवसरों का विषय है। 
साथ ही चुनौती भी कि इस असाधारण शक्ति का समुचित सदुपयोग हो। अन्यथा अनियंत्रित होने से यही ऊर्जा राष्ट्र विघातक विस्फोटक का कार्य भी कर सकती है। ऊर्जा को बलपूर्वक नियंत्रित नहीं किया जा सकता।
 जबरदस्ती अथवा दबाव से तो वह और अधिक विध्वंसक बन जाती है जैसे डटे हुए सेफ्टी वाल्व वाले प्रेशर कुकर में भांफ।
ऊर्जा के अनुशासित नियोजन का सर्वोत्तम तरीका है उसका सुव्यवस्थित परिचालन। 
ऊर्जा को सही दिशा में किसी ध्येय की ओर कार्य में लगा देना ही उसका सदुपयोग है। 
वर्तमान समय में भारतीय समाज के पास अपनी युवाशक्ति को सम्यक ध्येय के साथ सही दिशा की ओर कार्यरत करने की महती चुनौती हैं।
स्वंतत्रता के बाद सबसे बडी विकृती सारे समाज मे व्याप्त हुयी है वह है – शासनावलम्बिता।
हम छोटे से छोटे कार्य के लिए भी सरकार का मुँह ताकते हैं।
घर में सफाई करने के बाद सरकारी सडक पर सरेआम कचरा फेंकने वाले सभ्य नागरिक स्थानीय शासन से अपेक इच्छाएं रखते हैं 
यह स्वावलंबन नहीं है आज की आवश्यकता है कि हम स्वावलंबी हो पर समर्थ बने और दूसरों को भी समर्थक बन बनाएं
आइए हम स्वावलंबी जिला अभियान के सदस्य बन कर दूसरों को भी सदस्यता प्रदान करें।
2. कलाम साहिब 
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INDIA NEWS

Youth power can transform India: Kalam

Former president APJ Abdul Kalam says the great challenge of transforming India can be achieved through youth as they are enabled with ideas and ambition.

By HT Correspondent | IANS, Washington

UPDATED ON MAR 24, 2008 12:33 PM IST


Former president APJ Abdul Kalam says the great challenge of transforming India can be achieved through youth which has got the power of ideas, ambition and ability.

"This resource of the youth is an important building block for transforming India into a developed nation," he said at a breakfast meeting on Saturday with students of the prestigious Wharton business school, Philadelphia, America's oldest institution of its kind.

"If you have an aim in life, realise that spent time cannot be recovered," said Kalam, asserting that no youth today need to fear about the future. The former president was addressing the students at the 12th Wharton India Economic Forum (WIEF) held with the theme of "India Imagine".

The forum is designed to serve as a platform for thought-leaders, professionals and policy makers to define their perception of the global Indian and discuss the wave of new imagination that is spurring the nouveau Indian to create unprecedented opportunities.

"Hence the precious time has to be used for achieving the goal, have confidence to win, have confidence to defeat the problems and succeed and have a righteous heart; you will definitely succeed in all your missions," Kalam said.

"Success can only come to you by courageous devotion to the task lying in front of you. I can assert without fear of contradiction that the quality of the Indian mind is equal to the quality of any Teutonic, Nordic or Anglo-Saxon mind.

"What we lack is perhaps courage, what we lack is perhaps driving force, which takes one anywhere. We have, I think, developed an inferiority complex," the former president said, stressing "what is needed in India today is the destruction of that defeatist spirit.

"We need a spirit of victory, a spirit that will carry us to our rightful place under the sun, a spirit, which will recognise that we, as inheritors of a proud civilization, are entitled to a rightful place on this planet.
3.  Role of Youth in Shaping India’s Future

Pradeep Kumar Panda

Oct 27, 2018·5 min read

Youth are the most important and dynamic segment of the population in any country. It is believed that developing countries with large youth population could see tremendous growth, provided they invest in young people’s education, health and protect and guarantee their rights. We can undoubtedly say that today’s young are tomorrow’s innovators, creators, builders and leaders.

But they need the required support in terms of good health, education, training and opportunities to transform the future. The economic trigger happens when a county’s more hands to work available than more mouths to feed. To put it succinctly, working age population has to be larger than the dependent population.

Today, India is one of the youngest nations in the world with more than 62% of its population in the working age group (15–59 years), and more than 54% of its total population below 25 years of age. It is further estimated that the average age of the population in India by 2020 will be 29 years as against 40 years in USA, 46 years in Europe and 47 years in Japan. This gives us the edge of demographic dividend over other countries. The youth of today is increasingly becoming restless and struggling to remove the disparities. However, more efforts need to be put in, if we are to become free from the vicious circles of poverty, malnutrition, corruption, violence and unemployment. All these vices are still prevalent in the society, which are not allowing our great nation to function in its real spirit.

Unfortunately, being a democratic nation and largest democracy in the world, India is still lagging behind in achieving socio-political and economic equalities, which were dreamt by our predecessors. As a nation, since 72 years, we have been striving to eliminate these inequalities at all levels, which are existing in the forms of poverty, unemployment, illiteracy, corruption, violence, gender bias etc. India is ranked at 130 in Human Development Index, 115 in Human Capital Index, 100 in Global Hunger Index, 122 in World Happiness Index, 62 in Inclusive Development Index, 141 in Gender Development Index and 145 in Global Burden of Disease Study. India’s rank in various development indices has barely grown over the years. If India is to improve upon these indices, then the Indian Youth needs to take the charge and come forward to fight against multiple inequalities and contribute in nation building.



Tuesday, March 30, 2021

कविता अंश

कविता
मेरी हिम्मत देखना मेरी तबीअत देखना 
जो सुलझ जाती है गुत्थी फिर से उलझाता हूँ मैं 
वाह-रे शौक़-ए-शहादत कू-ए-क़ातिल की तरफ़ 
गुनगुनाता रक़्स करता झूमता जाता हूँ मैं 
रक्स = डांस, नाच करता, झूमता जाता हूँ मैं।
Jigar muradabadi

कम-हिम्मती ख़तरा है समुंदर के सफ़र में 
तूफ़ान को हम दोस्तो ख़तरा नहीं कहते
Nwaaz Deobandi

हर घूमी हुई जगह से इतेफाक रखता हू्ं 
मैं मुसाफ़िर हूं हर मक़ाम याद   रखता हूं

रोजी रोटी हक की बाते जो भी मुँह पर लाएगा
कोई भी हो, निश्चय ही वो कम्युनिस्ट कहलायेगा
जन कवि नागार्जुन, हमें भी जेटली जी कम्युनिस्ट विथ काऊ कहते थे।
जाती पाती से ऊपर उठकर देशभक्ति जोग आएगा अपना स्वार्थ छोड़कर जोजन धर्म संस्कृति को गायक कोई भी हो निश्चय ही हो आर एस एस वाला कहलाएगा
।।।
मिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब था 
वो उतनी दूर हो गया जितना क़रीब था ।

और मेरे पास कोई चोर दरवाज़ा नहीं

वो समझता था उसे पा कर ही मैं रह जाऊंगा
उस को मेरी प्यास की शिद्दत का अंदाज़ा नहीं

जा दिखा दुनिया को मुझ को क्या दिखाता है ग़ुरूर
तू समुंदर है तो है मैं तो मगर प्यासा नहीं

कोई भी दस्तक करे आहट हो या आवाज़ दे
मेरे हाथों में मिरा घर तो है दरवाज़ा नहीं

अपनों को अपना कहा चाहे किसी दर्जे के हों
और जब ऐसा किया मैं ने तो शरमाया नहीं

उस की महफ़िल में उन्हीं की रौशनी जिन के चराग़
मैं भी कुछ होता तो मेरा भी दिया होता नहीं

तुझ से क्या बिछड़ा मिरी सारी हक़ीक़त खुल गई
अब कोई मौसम मिले तो मुझ से शरमाता नहीं
।।।
शेर 20  शेर होंसले बढ़ाने के

1. सियाह रात नहीं लेती नाम ढलने का 
यही तो वक़्त है सूरज तिरे निकलने का 
शहरयार
रिश्ते निभाने हो तो थोड़े फांसले भी रखना,
बहुत नजदीक से चीज़े अक्सर धुंधली नज़र आती हैं, गुलज़ार
2. वक़्त की गर्दिशों का ग़म न करो 
हौसले मुश्किलों में पलते हैं 

महफूजुर्रहमान आदिल

3. प्यासे रहो न दश्त में बारिश के मुंतज़िर 
मारो ज़मीं पे पाँव कि पानी निकल पड़े 
इक़बाल साजिद


4. हार हो जाती है जब मान लिया जाता है 
जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है 
शकील आज़मी
5. जहाँ पहुँच के क़दम डगमगाए हैं सब के 
उसी मक़ाम से अब अपना रास्ता होगा 
आबिद अदीब

6. अब हवाएँ ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला 
जिस दिए में जान होगी वो दिया रह जाएगा 
महशर बदायुनी

7. साहिल के सुकूँ से किसे इंकार है लेकिन 
तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है 
आल-ए-अहमद सूरूर

8. इत्तिफ़ाक़ अपनी जगह ख़ुश-क़िस्मती अपनी जगह 
ख़ुद बनाता है जहाँ में आदमी अपनी जगह 
अनवर शऊर


9. कई इन्क़िलाबात आए जहाँ में

मगर आज तक दिन न बदले हमारे

भँवर से लड़ो तुंद लहरों से उलझो 
कहाँ तक चलोगे किनारे किनारे 
रज़ा हमदानी



10. ग़ुलामी में न काम आती हैं शमशीरें न तदबीरें 
जो हो ज़ौक़-ए-यक़ीं पैदा तो कट जाती हैं ज़ंजीरें 
अल्लामा इक़बाल


11.ये कह के दिल ने मिरे हौसले बढ़ाए हैं 
ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साए हैं 
माहिर-उल क़ादरी

13. लोग जिस हाल में मरने की दुआ करते हैं 
मैंने उस हाल में जीने की क़सम खाई है 
अमीर क़ज़लबाश

12. जलाने वाले जलाते ही हैं चराग़ आख़िर 
ये क्या कहा कि हवा तेज़ है ज़माने की 
जमील मज़हरी



14. रात को जीत तो पाता नहीं लेकिन ये चराग़ 
कम से कम रात का नुक़सान बहुत करता है 
इरफ़ान सिद्दीक़ी


15. ये और बात कि आँधी हमारे बस में नहीं 
मगर चराग़ जलाना तो इख़्तियार में है 
अज़हर इनायती
16. आँखों में पानी रखों, होंठो पे चिंगारी रखो

जिंदा रहना है तो तरकीबे बहुत सारी रखो
राह के पत्थर से बढ के, कुछ नहीं हैं मंजिलें
रास्ते आवाज़ देते हैं, सफ़र जारी रखो।

16. बेनाम-से इक ख़ौफ़ से दिल क्यों है परेशां

जब तय है कि कुछ वक़्त से पहले नहीं होगा।
खुशफ़हमी अभी तक थी यही कारे-जुनूँ में
जो मैं नहीं कर पाया किसी से नहीं होगा

अब रात की दीवार को ढाना है ज़रूरी
ये काम मगर मुझ से अकेले नहीं होगा
- शहरयार

2.


इधर फ़लक को है ज़िद बिजलियाँ गिराने की 
उधर हमें भी है धुन आशियाँ अपना बनाने की 
अज्ञात

 
कितना चालाक है वो यार-ए-सितमगर देखो,
उस ने तोहफ़े में घड़ी दी है मगर वक़्त नहीं।
                    अली सरमद
कमजोर मन वाले 
घर से निकले थे होंसला करके,
लौट आये खुदा, खुदा करके।...

दर्द होता है बैठ जाता हूँ, बैठता हूँ तो दर्द होता है ...
जॉन एलिया।
विकास की राह देख रहा एक बंदा दूसरे बंदे से शायद यह कह रहा है:

तुम्हें भी कोई उलझन रोकती है पेशक़दमी से..
मुझे भी लोग कहते हैं की ये जलवे पराए हैं..!!

-साहिर लुधियानवी
चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों 

न मैं तुम से कोई उम्मीद रखूँ दिल-नवाज़ी की 

न तुम मेरी तरफ़ देखो ग़लत-अंदाज़ नज़रों से 

न मेरे दिल की धड़कन लड़खड़ाए मेरी बातों से 

न ज़ाहिर हो तुम्हारी कश्मकश का राज़ नज़रों से 

तुम्हें भी कोई उलझन रोकती है पेश-क़दमी से 
।।।।

मुझे भी लोग कहते हैं कि ये जल्वे पराए
पर्यावरण संरक्षण: 
3. सौंपोगे अपने बाद विरासत में क्या मुझे,
बच्चे का ये सवाल है गूँगे समाज से...
- अशअर नजमी

दो शब्द तसल्ली के नहीं मिलते इस शहर में,
लोग दिल में भी दिमाग लिए घूमते हैं ।

आलोचना वाले
दरख्त ए नीम हूं मेरे नाम से घबराहट तो होगी
छांव ठंडी ही दूँगा, बेशक पत्तों में कड़वाहट तो होगी
अनाम
जब कुत्ते, बिल्ली, चूहा, गीदड़ सारे एक घाट पर इकट्ठा पानी पी रहे हों तो समझ लेना चाहिए कि दूसरे घाट पर शेर खड़ा है ।
वफ़ा-दारी ब-शर्त-ए-उस्तुवारी अस्ल ईमाँ है
मरे बुत-ख़ाने में तो काबे में गाड़ो बिरहमन को


....
मन मोया ते सोग न होया, न रोये रूहबारी, 
तन रोया ते यार मेरे न कूक गज़ब दी मारी।

 
मैंने कुछ लोग लगा रखे हैं पीठ पीछे बात करने के लिए 
पगार कुछ नहीं है उनकी पर काम बड़ी इमानदारी से करते हैं ।
कान्हूं
ज़फ़र गोरखपुरी
कितनी आसानी से मशहूर किया है ख़ुद को 
मैं ने अपने से बड़े शख़्स को गाली दे कर । 


2. "मिलकर बैठे हैं, महफ़िल में जुगनू सारे , ऐलान ये है कि सूरज को हटाया जाए।"
3. उस मुक़ाम पे आ गई है ज़िंदगी जहां ...
मुझे कुछ चीज़ें पसंद तो हैं पर चाहिए कुछ नहीं !!
अनाम
5.दर्द एक ही है बस 
इसके जायके दो हैं ,
कोई बिखरता है 
तो कोई निखरता है !!
6. मेरे दामन में अगर कुछ न रहेगा बाकी ,अगली नस्लों को दुआ देके चला जाऊंगा ।
धुआं दे के चला जाऊंगा।
मुजफ्फर रिजमी //
7. वो शख़्स जो झुक कर आपसे मिला होगा!
यक़ीनन उसका कद आपसे बड़ा होगा !!
8. "न नाविक,न साथी न हक़ में फ़िज़ाएं, है नौका भी ज़र्ज़र,ये कैसा सफर है,
फ़क़ीरी का अपना,अलग ही मज़ा है,न पाने की चिंता न खोने का डर है",...
अनाम
9.
अनाम
10. जुनूँ वही है ,वही मैं ,मगर है शहर नया 
यहाँ भी शोर मचा लूँ अगर इजाज़त हो 

Joan Alia
11. ‘साजिशें ऐसी हुईं है खो गई पहचान सब, खुद पता मैं पूछता हूं, आज अपने गांव का’।
अशोक मैत्रेय
12. पेड़ जुड़ें हैं ज़मीन से, हवा से झगड़ जाते हैं 
आसमान वालों का क्या है, बादल हवा के रुख़ से पलट जाते हैं 
अनाम
13. मैं बोलता हूँ तो इल्ज़ाम है बग़ावत का 
मैं चुप रहूँ तो बड़ी बेबसी सी होती है।
14. 
कभी रुकेंगी हवायें कभी बुझेंगे चिराग 
चलो चलो ये तमाशा तो रात भर होगा ।
एजाज अफजल //
15. 
शौक़ से आए बुरा वक़्त अगर आता है
हम को हर हाल में जीने का हुनर आता है
- रसूल साक़ी
16. ऊँची इमारतों से मकाँ मेरा घिर गया..
कुछ लोग मेरे हिस्से का सूरज भी खा गए.. !! 
17. वो अगर बात न पूछे तो करें क्या हम भी ?
आप ही रूठते हैं आप ही मन जाते हैं 
मजरुह सुलतानपुरी
18. #हुनर आने के भी ख़तरे बड़े हैं,
                 पता है ? 
        हाथ  कटवाने पड़े हैं।
19. बात 1955 की है। सउदी अरब के बादशाह "शाह सऊद" प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के निमंत्रण पर भारत आए थे। वे 4 दिसम्बर 1955 को दिल्ली पहुँचे जहाँ उनका पूरे शाही अन्दाज़ में स्वागात किया गया शाह सऊद दिल्ली के बाद वाराणसी भी गए। शाह सऊद, जितने दिन वाराणसी में रहे उतने दिनों तक बनारस के सभी सरकारी इमारतों पर "कलमा तैय्यबा" लिखे हुए झंडे लगाए गए थे। वाराणसी में जिन जिन रास्तों से "शाह सऊद" को गुजरना था, उन सभी रास्तों में पड़ने वाली मंदिर और मूर्तियों को परदे से ढक दिया गया था। इस्लाम की तारीफ़ और हिन्दुओं का मजाक बनाते हुए शायर "नज़ीर बनारसी" ने एक शेर कहा था
 - अदना सा ग़ुलाम उनका, गुज़रा था बनारस से॥
 मुँह अपना छुपाते थे, काशी के सनम-खाने॥
 आज योगी व मोदी शासनकाल में भी बड़े बड़े ताकतवर देशों के प्रमुख भारत आते हैं और उनको वाराणसी भी लाया जाता है, लेकिन अब मंदिरों या मूर्तियों को छुपाया नहीं जाता है बल्कि उन विदेशियों को गंगा जी की आरती दिखाई जाती है और उनसे पूजा कराई जाती है।
20. उसी का शहर वही मुद्दई वही मुंसिफ़, हमें यक़ीं था हमारा क़ुसूर निकलेगा*
21. बग़ैर इश्क़ अँधेरे में थी तिरी दुनिया 
चराग़-ए-दिल न जलाते तो और क्या करते 
अंधेरा माँगने आया था रौशनी की भीक 
हम अपना घर न जलाते तो और क्या करते 
नज़ीर banarasi
22. वो बुझ गया तो चला उसकी अहमियत का पता 
कि उस चिराग़ से कितने चिराग़ जलते थे। 
अनाम
वैसा ही,  यूं देखिये तो आँधी में बस एक शजर गया 
लेकिन न जाने कितने परिंदों का घर गया 
शजर /पेड़ 



श्रीधर वेम्बू

सॉफ्टवेयर डवलपमेंट कंपनी जोहो कॉर्प के फाउंडर और सीईओ श्रीधर वेम्बू ने अपना सफर साधारण व्यक्ति के रूप में शुरू किया और आज उन्होंने सैकड़ों मिलियन डॉलर की कंपनी खड़ी कर ली है। तमिलनाडु के मध्यमवर्गीय परिवार में पले-बढ़े श्रीधर के पिता हाई कोर्ट में स्टेनोग्राफर थे। श्रीधर ने अपनी स्कूली शिक्षा सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल से पूरी की। आईआईटी मद्रास से उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की। उसके बाद उन्होंने 1989 में प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी कम्प्लीट की।


इस दौरान उन्होंने पॉलिटिकल साइंस और इकोनॉमिक्स में गहरी दिलचस्पी होने के कारण कई किताबें पढ़ी। जापान, सिंगापुर और ताईवान जैसे बाजारों की सफलता के बारे में अध्ययन किया और समझा कि वे कैसे इतनी अच्छी तरह से विकसित हुए। उन्होंने महसूस किया कि इंडिया में सोशलिज्म हमारी प्रॉब्लम है और इस स्थिति को ठीक करना चाहिए। वर्ष 1994 में उन्होंने सैन डिएगो स्थित क्वालकॉम में नौकरी शुरू की।

यहां दो साल काम करने के बाद उन्होंने जॉब छोड़ दी और वापस भारत आ गए। वह नौकरी के बजाय अलग पहचान बनाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने वर्ष 1996 में एक छोटे से अपार्टमेंट में टोनी थॉमस के साथ मिलकर सॉफ्टवेयर वेंचर एडवेंट नेट शुरू किया। 2009 में कंपनी का नाम बदलकर जोहो रख दिया। वह अपने इस उद्यम को ऊंचाइयों पर ले जाना चाहते थे।

इसके लिए उन्होंने कई क्रांतिकारी फैसले लिए। इससे उनकी कंपनी लगातार ग्रोथ करने लगी। हालांकि इस दौरान उन्हें उतार-चढ़ाव के दौर से भी गुजरना पड़ा, लेकिन वह विचलित हुए बिना मुसीबतों का सामना करते हुए आगे बढ़ते रहे। डिग्री से ज्यादा कुशलता को महत्व देने वाले श्रीधर हमेशा कुछ न कुछ सीखते रहने में यकीन करते हैं।


Monday, March 29, 2021

SECTION विद्यार्थी व स्वदेशी

SECTION विद्यार्थी व स्वदेशी
S से स्टडी वेल भी हो सकता है।

1. S swadeshi, 
पहले कहते थे भगत सिंह पैदा हो लेकिन मेरे घर में नहीं अब कहते हैं भारत में स्वदेशी इंडस्ट्री बढ़े लेकिन मैं ब्रांड, व सस्ते के नाम पे विदेशी इस्तेमाल करता रहूं।  एक एक आइटम का परसेंटेज आदि के आंकड़े भी देने चाहिए। विद्यार्थियों से स्टेशनरी, कपड़ों के ब्रांड्स, समान अमेज़न की बजाए शहर में ऑनलाइन एप्प्स बनाना। पेंट्स आदि के ब्रांड्स। मां का बना जूता, रुचिकर Nik Wallenda: Beyond Niagara, कौन सी बीमारी और कौन से काम आती हैं desi दवा यथा जुकाम के लिए सरसों तेल नाक में डालना, पेट में जलन। यह प्रश्नोत्तरी आपको स्वयं प्रयोग का अनुभव है। 



2. E earning learning side by side:  एर्निंग के साथ लर्निंग पर कंसंट्रेशन। हर शहर में ऐसे लोग, C. एक लड़का महावीर तीर्थंकर में बताने आया, कितने किस्म के ऐसे लड़के होते हैं जिन्होंने इसमें सफलता पहुंचे।B. अमर बोस के उदाहरण। अभी तक जो देखें हैं: 
लर्निंग की क्या परिभाषा: आने वाली मुसीबतों की पहले से तैयारी। एप्पल निर्माता ने गरीबी के कारण जो कोर्सेज किया वो कितने काम आए।रीड कॉलेज कैलीग्राफी के लिए दुनिया में मशहूर था। पूरे कैम्पस में हाथ से बने हुए बहुत ही खूबसूरत पोस्टर्स लगे थे। मैंने सोचा कि क्यों न मैं भी कैलीग्राफी की पढ़ाई करूं।

मैंने शेरीफ और सैन शेरीफ टाइपफेस (serif and san serif typefaces) सीखे। मैंने इसी टाइपफेस से अलग-अलग शब्दों को जोड़कर टाइपोग्राफी तैयार की, जिसमें डॉट्स होते हैं। दस साल बाद मैंने पहला (Macintosh computer) डिजाइन किया। खूबसूरत टाइपोग्राफी के साथ यह मेरा पहला कम्प्यूटर डिजाइन था। यदि मैं कॉलेज से नहीं निकालता और मैंने कैलीग्राफी नहीं सीखी होती तो मैं यह नहीं बना पाता”।

3. Confidence in oneself: अपने शरीर की कीमत कितनी है। संत ने आत्महत्या वाले को कैसे रोका, एक एक अंग की कीमत बताई। विवेकानंद नास्तिक वो नही जिसे भगवान पर विश्वास नहीं, बल्कि अपने पर नहीं।
4. T traditional skill learning: पारिवारिक स्किल में भी बहुत लाभ होता है। भारत में साम्यवादियों ने इनसे दूर किया। मां बाप से दूरी हो गयी, दुनिया का सबसे विश्वस्त इंसान से बात नहीं होती है जो कि बाप ही हित है। जो लड़के पढ़ाई के बाद दुबारा खेती में लगे हैं।
5. I innovation: स्टार्टअप की यही परिभाषा है।
6. OFFICIAL प्लान्स, सरकारी योजनाओं जो कि गुजरात वालों ने बताई
7. NOT SERVICE SEEKERS BUT PROVIDER
कितने ऐसे प्रयोग हर शहर में देखते हैं। फिल्म अगर सिर्फ  मेहनत करोगे तो पसीना पैदा होगा, दिमाग लगाओ गए तो पैसा पैदा होगा।