Wednesday, August 21, 2013

NEW pamphlet on CHINA सावधान! विस्तारवादी ड्रेगन चीन से भारत को खतरा


सावधान! विस्तारवादी ड्रेगन चीन से भारत को खतरा।
क्या हम जानते है?
 1962 में चीन ने भारत पर आक्रमण कर 38000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर जबरदस्ती कब्जा कर लिया। इसके बाद 1963 में हमारे शत्रु पाकिस्तान ने पाक अधिकृत कश्मीर की 5183 वर्ग किलोमीटर भूमि चीन को और दे दी।
 चीन आज अरूणाचल प्रदेश सहित देश की 90,000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर अपना दावा जता कर सीमा चैकियाँ आगे बढ़ाते हुए घुसपैठ करके हमारे निर्माण कार्यों में बाधा डाल रहा है।
 चीन द्वारा जम्मू-कश्मीर को अपने नक्शांंे में भारत का अंग नहीं दिखाया जाता है। अरूणाचल प्रदेश को चीन का अंग दिखाकर वहां के नागरिकों को बिना पासपोर्ट वीजा के चीन आने का आमन्त्रण दिया जाता है।
 हमारे प्रधानमंत्री द्वारा अरूणाचल को ‘‘हमारा सूरज का प्रदेश’’ कहने पर चीन द्वारा हमारी महिला राजदूत को रात्रि 2 बजे उठाकर कड़ा विरोध व्यक्त करते हुए चेतावनी दी जाती है।
 चीन ने हमें आहत करने हेतु लश्कर-ए-तोयबा के आतंकवादी व जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर को अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रस्तुत भारत के प्रस्ताव का विरोध किया।
 तिब्बत से निकलने वाली ब्रह्मपुत्र नदी जो हजारो वर्षों से पूर्वी भारत का जीवन आधार है, चीन इसकी जल धारा अवरूद्ध कर रहा है।
 चीन ने भारतीय सीमा पर परमाणु मिसाइलें तैनात कर दी हैं जिनके मारक क्षेत्र में सम्पूर्ण भारत आता है।
 भारत की चारों ओर से घेराबंदी की दृष्टि से चीन ने पाकिस्तान (ग्वादर बंदरगाह), नेपाल, म्यांमार, बांग्लादेश (चटगांव बंदरगाह) एवं श्रीलंका में सैन्य गतिविधियाँ तेज कर दी है।
 हमारे देश के अतिसंवेदनशील स्थानों पर विविध परियोजनाओं में निर्माण के ठेके अत्यन्त कम दरों पर भरकर देश के अन्दर चीन अपनी उपस्थिति एवं गतिविधियाँ बढ़ा रहा है।
 चीन ने दैनिक उपयोग की लगभग प्रतयेक घटिया वस्तु को भारत के बाजारो में सस्ते मूल्य में पहुँचाकर स्थानीय उद्योगों को बंद कराने की स्थिति मंे पहुँचा दिया है। (चीन से भारत को आयात लगभग 4 लाख करोड़ रूपये वार्षिक है।)
 चीन का रक्षा बजट 200 अरब डालर है जबकि भारत का रक्षा बजट मात्र 4 अरब डालर है।
 निरन्तर चीनी घुसपेठ व सीमा अतिक्रमण के बाद भी गृह मंत्री द्वारा भारत-तिब्बत सीमा का रक्षण व प्रबन्ध सेना को सौंपने से इंकार कर देना और भी दुर्भाग्यपूर्ण है। सेना निरन्तर 1986 से रक्षण उसे सौंपने की मांग कर रही है। ऐसा करने के विरूद्ध गृह मंत्री तक का अड़ा रहना अत्यन्त गंभीर रूप से चिन्तापूर्ण हो।
हाल ही में 14 अप्रेल की रात्रि में बिना किन्ही टेंकों या तोपखाने के 40 चीनी सैनिकों ने हमारी सीमा में 19 किमी. तक घुसपैठ कर दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र में तम्बू गाड़ दिये। भारत सरकार उन्हें बाहर धकेलने के स्थान पर उनसे ब्लेकमेल होती चली गयी और उन्हें बाहर जाने को मनाने के लिये हमारी द्वारा अपनी ही सीमा में अपनी सेना को सीमा से 38 किमी. पीछे लेना पड़ा और हमारी सीमा में बनी अपनी रक्षा संरचनाएँ यथा सेना के बंकर आदि अपने ही हाथों तोड़ने पड़े।
परिणाम क्या हो सकते है?
 केन्द्र सरकार की सीमााओं पर अनदेखी एवं ढुलमुल नीति के कारण अरूणाचल एवं लद्दाख के सीमान्त प्रदेश गहन संकट में है।
 भारत के सभी पड़ोसी देशों में चीनी सैन्य उपस्थिति के कारण हमारा सम्पूर्ण देश संकट में है।
 अन्तर्राष्ट्रीय विरोध के बावजूद चीन द्वारा अपने क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र नदी पर बड़े बाँधों के निर्माण के फलस्वरूप असम सहित पूर्वोŸार राज्यों में सूखे की आशंका।
 सस्ते व घटिया चीनी उत्पादों के भारी आयात से हमारे यहाँ के लघु व मध्यम उद्योग जल्दी ही बंद होने के कगार पर हैं। जिससे लाखों लोगों के बेरोजगार होने का खतरा मंडरा रहा है।
 आज देश के सर्वाधिक कम्प्यूटर चीन के लीनोवो, केल्कुलेटर टेक्सन के और दूर संचार व कम्प्यूटर के साज सामान र्जो ज्म् व भ्न्ॅ।प् जैसी चीनी कम्पनियों के बिक रहे है। लेखन सामग्री व विद्युत उपकरणों से लेकर इलेक्ट्रोनिक सामान व पावर प्लाण्ट तक बड़ी संख्या के सभी प्रकार के चीनी उत्पाद देश में सर्वाधिक मात्रा में बिक रहे हैं।
हम क्या कर सकते हैं?
 समाज को जाग्रत करके केन्द्र सरकार पर दबाव डालकर देश की सीमाओं की रक्षा सुदृढ़ करना।
 सक्रिय एवं जागरूक नागरिक होने के नाते हम चीनी उत्पादों का तत्काल उपयोग बंद करने का दृढ़ संकल्प लेवें तथा अधिकाधिक समाज बन्धुओं को इस हेतु प्रेरित करें।
 केन्द्र सरकार पर दबाव बनाकर भारत में ट्यूरिस्ट वीजा पर रह रहे चीनी कर्मचारियों को देश से बाहर निकालना।
 संवेदनशील क्षेत्रों में दिए जा रहे ठेकों पर रोक लगाने की माँग करना।
 विभिन्न संगठनों द्वारा इस संदर्भ में सरकार पर दबाव डालने के लिए आयोजित धरनों, प्रदर्शनों, गोष्ठियों में सक्रियता से भाग लें।
हम पुनः सावधान हों - चीन आज तिब्बत, हांगकांग, ताईवान जैसे देशों को पूरी तरह निगल चुका है और यदि हम नहीं जागे तो यह दिन हमेंं भी देखने पड़ सकते है।
हम स्वयं जगंे - समाज को जगाएं - देश को बचाएं।
स्वदेशी अपनाएं - देश बचाएं।




-ः निवेदक ः-
स्वदेशी जागरण मंच, उदयपुर विभाग
सम्पर्क ः जयसिंह शक्तावत 9460573558
सौजन्य से ः-



3 comments:

  1. We have impotent people in our government.

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  2. Toh phir iske khilaf aavaz uthani padegi... Aap morcha ka aayojan kab kar rahe ho?

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