Sunday, January 14, 2018

स्वामी विवेकानंद की 5 शिक्षाएं

1. अच्छा स्वास्थ्य
2. एकाग्रता से ध्यान
3. आत्मविश्वास
4.जाति-पाति के विरुद्ध,
5. स्वमुक्ति नहीं, सर्वमुक्ति( देशभक्ति)

1. स्वास्थ्य,
A.शरीर-शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्
शरीर धर्म पालन का पहला साधन है ।
2.पिता ने मुझे क्या दिया, माँ से पूछा, 3.फुटबाल खेलना व गीता ज्ञान,
4.ट्रैन में अंग्रेज व शरीर सौष्ठव का प्रदर्शन,
5. पूरे भारत का भृमण, विदेश में सर्दी में रुकना,
Practical, चाउमीन, फास्टफूड, कोकाकोला, नशीले पदार्थ,
B. एकाग्रता, व ध्यान,
A. बचपन मे सकूल में ध्यानावस्था,
2.पुस्कालय से दो पुस्तक खरीदना, शब्द, वाक्यांश, वाक्य, पैरा, फिर पूरा पेज पढ़ने,
3.पंडित जी को उन्ही का श्लोक सुनाना, बाद में यही ध्यान अवस्था।
एकाग्रता, जोड़ना, दोहराना, concentration, association एंड repetition,

C. आत्मविश्वास, self confidence:
1.बचपन मे किश्ती में नाविक , उल्टी आना, साफ करने को कहना,
2.मनुष्य तूं बड़ा महान है,
3. बदमाशो में भाषण, गोली चली,
4. परमहंस से पूछा क्या तूने भगवान देखा
5. नास्तिक वो नही जिसे भगवान पँर, बल्कि अपने पँर विश्वास नहीं।

D. जाति-पाति में विश्वास नही, सबका पिता एक,
1.बचपन मे कई हुक्के, सबको पिया
2. चिलम हरिजन की पीना।
3. अंतिम दिनों में संथाल की पत्तल उठाई
(भगतसिंह की समानांतर कथा)
4. हमारा धर्म रसोई ने ही घुस रहता है, 
जाति होना और जातिवाद में अंतर ।

E. स्वमुक्ति नहीं, सर्वमुक्ति:
1. सारे देवी देवताओं को भूल भारतमाता की पूजा
2. काशी के पंडित से शास्त्रार्थ,
3. विदेश में गद्दे से उतर कर रो पड़ना
4.संगठन कार्य का महत्व,
अपने लिए नहीं, औरों के लिए जिये वही महापुरुष। रॉकफेलर प्रसंग।

F. संगठन कौशल्य: कैसे कैसे व्यक्ति चुने, देश विदेश में संगठन खड़ा किया, राम कृष्ण मिशन। 1000 आइल नामक स्थान पर उन्होंने कुछ शिष्यों के साथ कुछ दिन का प्रशिक्षण दिया। सारी दुनिया मे वेदांत का नाम फैला दिया।

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