Tuesday, February 20, 2018

गीत: धीरे धीरे यहां का मौसम बदलने

https://youtu.be/Thz0hS3B_c

दुष्यंत कवि के प्रेरक गीतों में अति उत्साह देने वाला गीत है और स्वर जानने के लिए ऊपर के लिंक को को कॉपी पेस्ट करें:
फिर धीरे-धीरे यहां का मौसम बदलने लगा है,
वातावरण सो रहा था अब आंख मलने लगा है

1.पिछले सफ़र की न पूछो , टूटा हुआ एक रथ है,
जो रुक गया था कहीं पर ,फिर साथ चलने लगा है

2.हमको पता भी नहीं था , वो आग ठण्डी पड़ी थी,
जिस आग पर आज पानी सहसा उबलने लगा है

3.जो आदमी मर चुके थे , मौजूद है इस सभा में,
हर एक सच कल्पना से आगे निकलने लगा है
4.बातें बहुत हो रही है , मेरे-तुमहारे विषय में,
जो रासते में खड़ा था परवत पिघलने लगा है.
5.ये घोषणा हो चुकी है , मेला लगेगा यहां पर,
हर आदमी घर पहुंचकर , कपड़े बदलने लगा है।
6.जो ठेंगड़ी जी ने रोपा, स्वदेशी मंच अब युवा है,
देशी विदेशी डाकुओं का, दम अब उखड़ने लगा है।

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