Tuesday, August 14, 2018

संघर्ष वाहिनी कार्यशाला भाग 2

4. भारत में हुए प्रमुख आन्दोलन :

1 सविनय अवज्ञा आन्दोलन( नमक आन्दोलन – 12 मार्च 1930 दाण्डी मार्च - सफल।

2 असहयोग आन्दोलन सितम्बर 1920 से फरवरी 1922 - जलियाँवाला बाग कांड।

3 वारडोली सत्याग्रह 1928 - नील की खेती और कर के विरूद्ध - सफल।

4 भारत छोड़ो आन्दोलन, अगस्त 1942 - विफल।    

5 केन्द्र सरकार की तानाशाही के विरूद्ध छात्र आन्दोलन, 1974 - सफल।       

          स्वदेशी जागरण मंच देश की आर्थिक स्वावलंबन]  तत्कालिकरूप से GATT एवं WTO के  खिलाफ चलने वाला एक आंदोलन है। जुलाई 1991 में भारत सरकार के वित्तमंत्री मनमोहन सिंह ने नईआर्थीक नीति की घोषणा संसद में किया। उसके पश्चात स्वदेशीजागरण मंच का गठन 22 नवंम्बर 1991 को हुआ। केन्द्र सरकार नेअप्रेल 1994 में WTO के समझौते पर हस्ताक्षर कर दिया। 1 जनवरी 1995 से WTO समझौता लागु हो गया। नई आर्थिक निति की घोषणाके समय से स्वदेशी जागरण मंच पुरे देश में आन्दोलन चला रहा है।हमारे आन्दोलन को अनेक मोर्चां पर सफलता मिली है।  जिसके कारणआज WTO मरणासन्न की स्थिति में पहुंच गया है। परन्तु हमें इसआन्दोलन में पूरी सफलता प्राप्त करने के लिए अपने आन्दोलन कोऔर तेज करना होगा। स्वदेशी जागरण मंच वर्तमान में देश की सुरक्षा,शिक्षा, व्यापार, रोजगार, संस्कृति पर हो रहे आक्रमण के खिलाफवैचारिक एवं अहिंसात्मक संघर्ष के तरीके से लगातार आंदोलनरत है।

 

5.     स्थानीय मुद्दे एवं सफलता की गाथा

       क. विषय

       ख. प्रभावित लोग एवं क्षेत्र

       ग. जनभावना कैसी थी एवं हमलोगों ने उसकोकैसे प्रस्तुत किया

       घ. कार्यक्रम की रचना एवं इसमें जनभागीदारी

       ड. नेतृत्व, समिति एवं समन्वय

       च. कानूनी लड़ाई

       छ. परिणाम - वर्तमान स्थिति

6.      आंदोलनधर्मी कार्यकर्ता और कार्यक्रम

 

कार्यकर्ता :

       क. कार्यकर्ता के लक्षण

       ख. सामूहिक निर्णय

       ग. नेतृत्व

       घ. समन्वयक

       ड. कार्यक्रम रचना की कला

       च. सामूहिक दृष्टि

कार्यक्रम:

क. प्रभावित लोगों की अधिकतम भागीदारी युक्तकार्यक्रम

ख. प्रभावित क्षेत्रानुसार कार्यक्रम

ग. क्रमवार कार्यक्रम नीचे से उपर

घ. कार्यक्रम के बीच समय का अंतराल

च. जागरणात्मक एवं विरोधात्मक

छ. कानूनी विषय

ज. बौद्धिक एवं प्रचार

 

7. संघर्षवाहिनी की कार्य पद्धति

 

1.      अ0भा0 टोली

इस टोली में अ.भा. संघर्षवाहिनी प्रमुख के अलावे देश मेंसफलतापूर्वक आंदोलन चलाने वाले प्रमुख कार्यकर्ता,चिंतक, लेखक, पत्रकार, वकील इत्यादि।  टोली में 5-10तक कुल संख्या होनी चाहिए।  साल में दो बैठक होनीचाहिए। इस बैठक में राष्ट्रीय स्तर की समस्याओं पर विचारविमर्श राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन की रूपरेखा तय करनातथा राष्ट्रीय सम्मेलन, राष्ट्रीय सभा तथा राष्ट्रीय परिषद कीबैठक में इसकी घोषणा करना।  साल में एक बारसंघर्षवाहिनी की राष्ट्रीय परिषद् की बैठक आयोजित करन,इस बैठक में देशभर में चलने वाले आंदोलन की समीक्षाकरना, इस बैठक मे अ.भा. टोली, प्रांतीय टोली, प्रांतीयसंचालन समिति, जिला संघर्षवाहिनी प्रमुख को बुलाना।

2.      प्रांतीय टोली

प्रांत संघर्षवाहिनी प्रमुख के अलावे प्रांत स्तर पर आंदोलनचलाने वाले प्रमुख कार्यकर्ता, चिंतक, लेखक, पत्रकार,वकील इत्यादि।  टोली की कुल संख्या 5-10 तक होनीचाहिए।

3.      प्रांतीय संचालन समिति

        प्रांत टोली$जिला संघर्षवाहिनी प्रमुख-सह प्रमुख

        प्रांतीय संचालन समिति की साल में एक बैठक होनीचाहिए।  इस बैठक में प्रांतीय स्तर की समस्याओं परआंदोलन की रूपरेखा तैयार करना है।  प्रांत सम्मेलन मेंआंदोलन की घोषणा करना।

4.      जिला टोली

जिला संघर्षवाहिनी प्रमुख-सह प्रमुख के अलावे आंदोलनचलाने वाले प्रमुख कार्यकर्ता, लेखक, पत्रकार, वकीलइत्यादि।

5.      जिला संचालन समिति

प्रांतीय टोली, नगर संघर्षवाहिनी प्रमुख-सह प्रमुख,समविचारी संगठनों के दो-दो प्रतिनिधि, किसान, व्यापारी,मजदूर तथा अन्य कर्मचारी संगठनों के दो-दो प्रतिनिधि,विद्यार्थी संगठन।

        साल में तीन बार संचालन समिति की बैठक, बैठक मेंचलने वाले आंदोलन की समीक्षा करना तथा नये विषयों परआंदोलन की रूपरेखा तैयार करना।  आंदोलन चलाने केलिए अलग-अलग संचालन समिति गठिथ करना।

        विषयवार आंदोलन के संचालन समिति में, जिसविषय पर आंदोलन चलाना है,  उससे प्रभावित क्षेत्र केसंगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल करना।  संयोजकसहसंयोजक$प्रचार प्रमुख$कोष संग्रह समिति कार्यक्रम,प्रमुख इत्यादि।

        सभी समितियों में स्वदेशी जागरण मंच केपदाधिकारी स्थाई आमंत्रित सदस्य होंगे।  आंदोलन में जमाहोनेवाले राशि स्व.जा.म. के खाता में जमा होगा।

        आंदोलन के लिए स्थानीय मुद्दे का चयन करना एवंआंदोलन संचालन करने वाली समिति की बैठकआवश्यकतानुसार करनी चाहिए। आंदोलन के लिए मोर्चाका गठन करना।  आंदोलन पूर्ण होने पर आंदोलन समितिको भंग कर देना है।

विषय

1. स्वदेशी जागरण मंच का परिचय एवं आंदोलनका इतिहास

2. आंदोलन का स्वरूप, क्यां और कैसे

3. संघर्षवाहिनी का स्वरूप एवं कार्य पद्धति

4. आंदोलन में प्रचार की भूमिका

5. स्थानीय मुद्दे एवं सफलता की गाथा

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