Thursday, August 5, 2021

पर्यावरण विभाग

लगभग दो वर्ष पूर्व संघ ने पर्यावरण विभाग बनाया। इसमें ज्यादा बाते नहीं रखा है। पर्यावरण विभाग के 3 मुख्य कार्यक्षेत्र हैं:  
पानी, पौधे, एवं प्लास्टिक । 
तथा 
6 कार्य विभाग हैं , मातृशक्ति कार्य विभाग, दूसरा धार्मिक संस्थान, तीसरा शिक्षण संस्थान, चौथा एनजीओज़I,  पांचवा प्रचार विभाग और छटा, विभिन्न क्षेत्रों के साथ संपर्क। सुना है अंत के दो विसर्जित करने का प्रयास हो रहा है। 

इसके अतिरिक्त फाइव स्टार घर, फाइव स्टार मंदिर स्थल,  फाइव स्टार विद्यालय या कोई भी संस्थान हो । उनके अंदर फाइव स्टार होने के लिए पांच बातें आवश्यक हैं। 
क्रमांक 1 घर का पानी घर में प्रयोग 
2. सौर ऊर्जा से घर में प्रकाश व्यवस्थाएं
3.  घर का कचरा घर में रखना और उसकी खाद आदि बनाना और
4.  पेड़ पौधे लगाना और
5.  पांचवा है घर में चिड़िया पक्षी आदि आए। 

विद्या भारती के अनेक विद्यालय इस और प्रयास कर रहे हैं और घरों पर भी यह प्रयास हो रहा है। यह बातचीत हैदराबाद की बैठक में 2 अगस्त को उनकी टोली में हुई। 
इससे पहले जब यह बना था तो यह खतरा महसूस होता था की जगह जगह जगह जगह प्रदर्शन पर्यावरण नीति के खिलाफ होंगे. सरकार के खिलाफ होंगे । तो उन सब संघर्ष की बातों को छोड़कर सकारात्मक ढंग से रचनात्मक ढंग से अपना काम हो इस और लगाया गया है।  प्रचार कम हो और अधिक से अधिक कार्य हो इसका भी ध्यान रखा जाए एक बात पर बहुत आग्रह है कि पर्यावरण लोगों की जीवन में आए यथा कम पानी प्रयोग करना और धीरे-धीरे व्यक्ति घर इसके निर्माण के अपना काम करें। 

संजीव जी पौदे, राजेश चौहान व

“The RSS’ work has reached a certain level and now we feel that it is time to take a big leap in terms of expansion of the work. The RSS has decided to take up a new initiative in the field on environment protection and conservation,” said Bhaiyya ji Joshi.

At Gwalior ABPS MEET 2019 HELD ON MARCH 8,9 MARCH, Bhaiyya Joshi was "Elaborating upon the new initiative of the RSS, he said that the Sangh will take up various activities along with the society in the field of environment protection and conservation through initiatives in three key areas – water conservation and water management, planting trees and eliminating the use of plastic and other non-biodegradable material like Thermocol.

He also added that we decided to assign a dedicated team to inculcate an integrated approach to address the environment-related concerns, which was later implemented in the Pratinidhi Sabha. Though concerns are global, many a time, solutions are rooted in the local geo-cultural approach and conventional wisdom. The societal participation will ensure the integration of different approaches while addressing the problems.

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