Sunday, February 14, 2021

इतिहास संशोधन: सान्याल

इतिहास 
 कुछ दिन पहले एक वीडियो सुनाओ संजीव सानयाल का चीफ इकोनामिक एडवाइजर जो है इतिहास को देखने के लिए कैसे गलत नैरेटिव सेट किया गया है।
1. पहला कि हमेशा ही दिल्ली ही फोकस में नजर आता है बाकी प्रदेशों का कोई चिंता नहीं 
2. दूसरा अंग्रेजों का काल और मुगलों का काल के बारे में अधिक बताया जाता है भारतीय राजाओं के बारे में नहीं और उसके कुछ अच्छे उदाहरण भी देता है 
3. तीसरा 1947 में आजादी अहिंसा से मिले और क्रांतिकारी कुछ थे अच्छे-अच्छे पर हो थोड़े-थोड़े कहीं बिखरे हुए स्वरूप में थे कोई ऑल इंडिया योगदान नहीं था 
4. और इससे पहले भारत का इतिहास राजाओं का इतिहास रहा है उसमें आम व्यक्ति का कोई योगदान संत महात्माओं के योगदान सामाजिक क्रांतिकारियों के योगदान को नकारा जाता है ऐसी कुछ बातें उसने अपनी वीडियो में और यह हमको भी देखना चाहिए कि कैसे जब आर्किटेक्चर का नाम आता है तो आपको लाल किला और ताजमहल तक समाप्त किया जाता है बीच में भारतीय स्थापत्य कला का कोई योगदान नहीं दिखाएं अशोक को भी दिखाया जाता है इसलिए अहिंसा का प्रेम ही था जबकि इतिहास इसके विपरीत है यह कहानियां घड़ी गई है राणा प्रताप लक्ष्मी बाई यह तो कुछ कवियों में कुछ लेखकों ने और कुछ प्रदेशों में प्रसिद्ध है वरना महानता अकबर शासन तो बड़ा औरंगजेब शाहजहानी था उदारता तो हिमायू
5. व्यक्तिगतवीरता और सामुहिक पराजय:   हां एक और बिंदु जोड़ा जाता है युद्ध त्वचा परंतु वह आ रही और बताया जाता है यह पृथ्वीराज चौहान अच्छा था लेकिन कैद में ही मर गया झांसी की रानी वीर थी परंतु नाले के पास ही शहीद हो गए महाराणा प्रताप बलशाली थे लेकिन हल्दीघाटी में हारना ऐसे ही हमारा इतिहास पूरा का पूरा भरा जाएगा इतिहास बताया जाता है परंतु सच्चाई एकदम इसके विपरीत है.

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