Sunday, August 23, 2020

ओ घोड़े समर भवानी के

कुछ दिन पहले एक कविता बलबीर सिंह करुण द्वारा सुनी  जिसमें झांसी की रानी का गुणगान किया जाता है लेकिन उनके घोड़े से कवि गुहार करते हैं यह अगर तुम थोड़ा ओर जोर लगा लेते तो भारत का भाग्य कुछ और ही होता। 
ओ घोड़े समर भवानी के, लक्ष्मी बाई मर्दानी के। हम जानते हैं कि तात्या टोपे और रानी की संयुक्त सेनाओं ने ग्वालियर के विद्रोही सैनिकों की मदद से ग्वालियर के एक क़िले पर क़ब्ज़ा कर लिया। बाजीराव प्रथम के वंशज अली बहादुर द्वितीय ने भी रानी लक्ष्मीबाई का साथ दिया और रानी लक्ष्मीबाई ने उन्हें राखी भेजी थी इसलिए वह भी इस युद्ध में उनके साथ शामिल हुए। 18 जून 1858 को ग्वालियर के पास कोटा की सराय में ब्रितानी सेना से लड़ते-लड़ते रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु हो गई। लड़ाई की रिपोर्ट में ब्रितानी जनरल ह्यूरोज़ ने टिप्पणी की कि रानी लक्ष्मीबाई अपनी सुन्दरता, चालाकी और दृढ़ता के लिये उल्लेखनीय तो थी ही, विद्रोही नेताओं में सबसे अधिक ख़तरनाक भी थी। 
ओ घोड़े समर भवानी के, लक्ष्मी बाई मर्दानी के।
तू चूक गया लिखते- लिखते,  कुछ किस्से अमर कहानी के।।
तू एक उछाल हुमक भरता, नाले के पार उतर जाता।
केवल तूं इतना कर जाता,चाहे  अगले पल मर जाता।।
(तेरे थोड़े से साहस से, भारत का भाग्य बदल जाता)
ओ घोड़े समर भवानी के...........
(1)
क्या उस दिन तेरी काठी पर असवार सिर्फ महारानी थी।
क्या अपना बेटा लिए पीठ पर केवल झांसी की रानी थी।।
घोड़े तू शायद भूल गया, भावी इतिहास पीठ पर था। 
हे अश्व काश समझा होता भारत का भाग्य पीठ पर था।।
साकार क्रान्ति सचमुच उस दिन तुझ पर कर रही सवारी थी।
हे अश्व काश समझा होता वो घड़ी युगों पर भारी थी।।
तेरे थोड़े से साहस से, भारत का भाग्य बदल जाता।
घोड़े बस इतना कर जाता नाले के पार उतर जाता।। चाहे..
ओ घोड़े समर भवानी के........... वह तुलना भी करता है कि जैसा महाराणा प्रताप के घोड़े ने नाले को पार करते समय हिम्मत दिखाई थी। तब भारत का इतिहास अलग होता।  बहुत मार्मिक शब्दों में कि तुम अगर जान नहीं पाया कि तेरे ऊपर सिर्फ झांसी की रानी नहीं बैठी थी और झांसी की रानी में साथ उसका बेटा नहीं बैठा था पूरा इतिहास बैठा था पूरा देश बैठा। ऐसे ही आज भी कई बार लगता है कि थोड़ा हम और जोर लगा लें तो भारत का भविष्य और ही होगा। फिर हमें याद कर दुत्कारा नहीं, सत्कारा जाएगा,   कोसा नहीं जाएगा, यादों को पालापोसा जाएगा, 
बलबीर सिंह करुण
ओ घोड़े समर भवानी के, लक्ष्मी बाई मर्दानी के।
तू चूक गया लिखते- लिखते,  कुछ किस्से अमर कहानी के।।
तू एक उछाल हुमक भरता, नाले के पार उतर जाता।
केवल तूं इतना कर जाता,चाहे  अगले पल मर जाता।।
(तेरे थोड़े से साहस से, भारत का भाग्य बदल जाता)
ओ समर भवानी के...........
(1)
क्या उस दिन तेरी काठी पर असवार सिर्फ महारानी थी।
क्या अपना बेटा लिए पीठ पर केवल झांसी की रानी थी।।
घोड़े तू शायद भूल गया, भावी इतिहास पीठ पर था। 
हे अश्व काश समझा होता भारत का भाग्य पीठ पर था।।
साकार क्रान्ति सचमुच उस दिन, तुझ पर कर रही सवारी थी।
हे अश्व काश समझा होता वो घड़ी युगों पर भारी थी।।
तेरे थोड़े से साहस से, भारत का भाग्य बदल जाता।
घोड़े बस इतना कर जाता नाले के पार उतर जाता।। चाहे..
ओ घोड़े समर भवानी के...........
हे अश्व काश उस दिन तूने, चेतक को याद किया होता।
नाले पर ठिठके पांवों में,  थोड़ा उन्माद भरा होता।।
चेतक भी यूं ही ठिठका था, राणा सरदार पीठ पर था।
था लहूलुहान थका- हारा,  मेवाड़ी ताज पीठ पर था।।
पर नाले के पार कूदने तक, चेतक ने सांस नही तोड़ी।
 स्वामी का साथ नही छोड़ा मेवाड़ी आन नही तोड़ी।।
भूचाल चाल में भर लेता,  कर अपना नाम अमर जाता।
घोड़े बस
नालेके  पार उतर जाता चाहे अगले पल मर जाता।।
ओ घोड़े समर भवानी के...........
जो होना था हो गया मगर वो कसक आज तक मन मे है।
तेरी उस झिझकन, ठिठकन की, वो चुभन आज तक मन मे है।।
हे नाले तू ही कुछ कर जाता, निज पानी सोख लिया होता।
रानी को मार्ग दिया होता अन -भल को रोक लिया होता।।
तो तुझको गंगा मान आज हम तेरा ही पूजन करते।
तेरे जल के छीटे लेकर हम अपने तन पावन करते।। 
तेरे उस एक फैसले से,  भावी का लेख बदल जाता।....
घोड़े बस इतना कर जाता नाले के पार उतर जाता।।
वो घोड़े समर भवानी के लक्ष्मी बाई मर्दानी के।
तू चूक गया लिखते - लिखते कुछ किस्से अमर कहानी 

2 comments:

  1. Replies
    1. बहुत ही सुन्दर रचना है बलवीर सिंह करुण जी की आपकी कविता में शौर्य, मधुरता, प्रेम, सहानुभूति, देशभक्ति झलकती है। ओ घोड़े समर भवानी के.........🚩🙏🚩

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