Sunday, September 5, 2021

भगतसिंह

1. उनके परिवार के बारे में: प्रायः जो कहा जाता है कि भगतसिंह पैदा तो होना चाहिए, लेकिन हमारे घर में नहीं, बल्कि अब तो कहने लगे हैं कि हमारी गली में भी नहीं, वरना हमारे छोरों को भी बिगाड़े गया, भगतसिंह उसके अपवाद थे। चाचा स्वर्णसिंह, पिता जी, दादी सभी इसी विचार के। पुलिस से3 कैसे क्रांतिकारियों को छिपाया। B. बेवतनी में जिये चाचा और कैसे आज़ादी आते ही शरीर छोड़ गए। 
2.  गलतफहमियां जन्म आदि के बारे में उनके जन्मस्थान के बारे में: इस पंजाब में नहीं, अबके पाकिस्तान में हैं, नाम बंगा मिलताजुलता है। ऐसे ही अन्य क्रांतिकारियों के बारे में गलतफहमी होती है। जलियांवाला के जालिम को गोली से उड़ाया था ऊधमसिंह ने, लेकिन जनरल डायर को नहीं गवर्नर माइकेल odwire को , दायर तो पहले ही मर चुका था।
B. उनकी शादी के बारे में उनकी घोड़ी की बात। उसका इतिहास। पॉपुलर साहित्य।  , जदों भगतसिंह सरदार नूं दित्ता फांसी दे हुक्म सुना, ओहदी होवन वाली नार नूं, किसे पिंड विच दसिया जा, ओह चल पई खातिर प्रेम दे, कहँदी रब्बा मेल कर। जा पहुंची विच लाहौर दे, मिली जेल दरोगे ने जा।
3. फांसी के समय भी बच सकता था।कैसे बच सकता था। जिस मरने से  जग  डरे, मेरे मनआनंद।
4. छुआछूत के विरुद्ध:भगत सिंह की बैरक की साफ-सफाई करने वाले वाल्मीकि समाज के व्यक्ति का नाम बोघा था। भगत सिंह उसको बेबे (मां) कहकर बुलाते थे। जब कोई पूछता कि भगत सिंह ये भंगी बोघा तेरी बेबे कैसे हुआ? तब भगत सिंह कहता, मेरा मल-मूत्र या तो मेरी बेबे ने उठाया, या इस भले पुरूष बोघे ने। बोघे में मैं अपनी बेबे (मां) देखता हूं। ये मेरी बेबे ही है।
यह कहकर भगत सिंह बोघे को अपनी बाहों में भर लेता।
भगत सिंह जी अक्सर बोघा से कहते, बेबे मैं तेरे हाथों की रोटी खाना चाहता हूँ। पर बोघा अपनी जाति को याद करके झिझक जाता और कहता, भगत सिंह तू ऊँची जात का सरदार, और मैं एक अदना सा भंगी, भगतां तू रहने दे, ज़िद न कर।
सरदार भगत सिंह भी अपनी ज़िद के पक्के थे, फांसी से कुछ दिन पहले जिद करके उन्होंने बोघे को कहा बेबे अब तो हम चंद दिन के मेहमान हैं, अब तो इच्छा पूरी कर दे!
बोघे की आँखों में आंसू बह चले। रोते-रोते उसने खुद अपने हाथों से उस वीर शहीद ए आजम के लिए रोटिया बनाई, और अपने हाथों से ही खिलाई। भगत सिह के मुंह में रोटी का गास डालते ही बोघे की रुलाई फूट पड़ी। ओए भगतां, ओए मेरे शेरा, धन्य है तेरी मां, जिसने तुझे जन्म दिया। भगत सिंह ने बोघे को अपनी बाहों में भर लिया।
ऐसी सोच के मालिक थे अपने वीर सरदार भगत सिंह जी...। परन्तु आजादी के 70 साल बाद भी हम समाज में व्याप्त ऊँच-नीच के भेद-भाव की भावना को  दूर करने के लिये वो न कर पाए जो 88 साल पहले भगत सिंह ने किया। 
महान शहीदे आजम को इस देश का सलाम।
 5. देश चरखे से आज़ाद हुआ, ले दी हमे आज़ादी बिना खड़ग बिना धार, ...... पूरे तालमेल से बोलना।
Facts: 

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